विवेकी राय के उपन्यासों में आंचलिक संस्कृति का अध्ययन

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  • डॉ. वर्षा रानी सहायक प्राध्यापक, शिक्षा संकाय, द .आई.सी.एफ.ए.आई.विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत
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DOI:

https://doi.org/10.71366/ijwos03042625490

Keywords:

आंचलिक संस्कृति, त्यौहार, परम्पराएँ, आतिथ्य सत्कार, खेत–खलिहान, व्यावहारिक जीवन, सोनामाटी, समर शेष है, बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, सोनामाटी, समर शेष , नमामि ग्रामम्, मंगल भवन, अमंगलहारी ।

Abstract

विवेकी राय आंचलिक कथाकार कहे जाते हैं। प्रदेश विशेष की संस्कृति अथवा जीवन के समग्र चित्रण को आंचलिकता के क्रम में रखा जाता है। लेखक परिवेश की सच्चाई को बड़ी बारीकी से समझते हैं चाहे वह सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक तथा गरीबी, किसी भी तरह की समस्या हो सभी को नजदीक से चिंतन करते हैं । इनके उपन्यास बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, श्वेतपत्र, सोनामाटी, समर शेष है, नमामि ग्रामम्, मंगल भवन, अमंगलहारी आदि हैं। उपन्यासों में कोई बनावटी संस्कृति नहीं है उन्होंने गांव के खेत–खलिहान, नदी-तालाब, गलियों में खेलने वाले बच्चों की अठखेलियाँ, किसानों के कार्यों, तीज- त्यौहारों, परम्पराओं को बिना हिचक दर्शाया गया है तथा ग्रामीण यथार्थता के साथ गाँवों के आतिथ्य सत्कार, व्यावहारिक जीवन को भी गर्व के साथ वर्णन किया गया है।

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Published

2026-04-19

How to Cite

[1]
डॉ. वर्षा रानी , “विवेकी राय के उपन्यासों में आंचलिक संस्कृति का अध्ययन”, Int. J. Web Multidiscip. Stud. pp. 195-199, 2026-04-19 doi: https://doi.org/10.71366/ijwos03042625490 .