विवेकी राय के उपन्यासों में आंचलिक संस्कृति का अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.71366/ijwos03042625490Keywords:
आंचलिक संस्कृति, त्यौहार, परम्पराएँ, आतिथ्य सत्कार, खेत–खलिहान, व्यावहारिक जीवन, सोनामाटी, समर शेष है, बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, सोनामाटी, समर शेष , नमामि ग्रामम्, मंगल भवन, अमंगलहारी ।
Abstract
विवेकी राय आंचलिक कथाकार कहे जाते हैं। प्रदेश विशेष की संस्कृति अथवा जीवन के समग्र चित्रण को आंचलिकता के क्रम में रखा जाता है। लेखक परिवेश की सच्चाई को बड़ी बारीकी से समझते हैं चाहे वह सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक तथा गरीबी, किसी भी तरह की समस्या हो सभी को नजदीक से चिंतन करते हैं । इनके उपन्यास बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, श्वेतपत्र, सोनामाटी, समर शेष है, नमामि ग्रामम्, मंगल भवन, अमंगलहारी आदि हैं। उपन्यासों में कोई बनावटी संस्कृति नहीं है उन्होंने गांव के खेत–खलिहान, नदी-तालाब, गलियों में खेलने वाले बच्चों की अठखेलियाँ, किसानों के कार्यों, तीज- त्यौहारों, परम्पराओं को बिना हिचक दर्शाया गया है तथा ग्रामीण यथार्थता के साथ गाँवों के आतिथ्य सत्कार, व्यावहारिक जीवन को भी गर्व के साथ वर्णन किया गया है।
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